भारत-चीन सीमा विवाद और चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति का मुकाबला करने के लिए भारत की कूटनीति की विवेचना करें।

 Q.  भारत-चीन सीमा विवाद और चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति का मुकाबला करने के लिए भारत की कूटनीति की विवेचना करें। 

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भारत-चीन सीमा विवाद और 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' के विरुद्ध भारत की कूटनीतिक रणनीति

इक्कीसवीं सदी के एशियाई भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत और चीन के मध्य के संबंध अत्यंत जटिल और बहुआयामी हैं। एक ओर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अनसुलझा सीमा विवाद (यथा गलवान घाटी और तवांग गतिरोध) भूमि सीमाओं पर अस्थिरता उत्पन्न कर रहा है, वहीं दूसरी ओर चीन अपनी महत्वाकांक्षी 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' (String of Pearls) रणनीति के माध्यम से हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की सामरिक घेराबंदी का प्रयास कर रहा है। इन दोहरी चुनौतियों (Two-front Challenges) का सामना करने के लिए भारत ने अपनी विदेश और रक्षा नीति में संरचनात्मक बदलाव करते हुए एक आक्रामक और बहुस्तरीय कूटनीतिक ढांचा तैयार किया है।

भारत-चीन सीमा विवाद: कारण और कूटनीतिक समाधान

भारत और चीन के बीच लगभग 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा का कोई स्पष्ट और पारस्परिक रूप से सहमत सीमांकन (Demarcation) नहीं है, जो विवाद का मुख्य कारण है।

  • विवाद के मूल कारण (Causes):

    • ऐतिहासिक संधियों की अस्वीकृति: चीन द्वारा मैकमोहन रेखा (McMahon Line) और जॉनसन लाइन को मान्यता न देना।

    • 'सलामी स्लाइसिंग' (Salami Slicing) रणनीति: चीन द्वारा धीरे-धीरे और लगातार भारतीय क्षेत्रों में छोटे-छोटे अतिक्रमण कर भौगोलिक यथास्थिति (Status Quo) बदलने का प्रयास।

    • सुरक्षा दुविधा (Security Dilemma): सीमांत क्षेत्रों में चीन द्वारा त्वरित गति से सैन्य अवसंरचना (सड़कें, दोहरे उपयोग वाले गाँव) का निर्माण।

  • भारत का कूटनीतिक और रणनीतिक प्रतिकार (Diplomatic Solutions):

    • समानांतर अवसंरचना विकास: 'बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन' (BRO) द्वारा दरबूक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी (DSDBO) जैसे सामरिक मार्गों का निर्माण और सीमावर्ती क्षेत्रों से पलायन रोकने हेतु 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' (Vibrant Villages Programme) का क्रियान्वयन।

    • बहुस्तरीय कूटनीतिक वार्ता: वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोआर्डिनेशन (WMCC) और कोर कमांडर स्तर की वार्ताओं के माध्यम से तनाव कम करने (De-escalation) और डिसएंगेजमेंट पर बल देना।

    • आर्थिक कूटनीति का शस्त्रीकरण: चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध और 5G नेटवर्क से चीनी कंपनियों को बाहर कर भारत ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि "सीमा पर शांति के बिना सामान्य व्यापारिक संबंध संभव नहीं हैं।"

'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति और भारत का कूटनीतिक प्रतिकार

'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' चीन की एक भू-सामरिक नीति है, जिसके तहत वह ऊर्जा मार्गों (मुख्यतः मलक्का जलडमरूमध्य) को सुरक्षित करने और भारत को घेरने के लिए ग्वादर (पाकिस्तान), हंबनटोटा (श्रीलंका), क्याउकफ्यू (म्यांमार) और चटगांव (बांग्लादेश) में नौसैनिक एवं वाणिज्यिक ठिकानों का नेटवर्क बना रहा है।

चीन की इस 'ऋण-जाल कूटनीति' (Debt Trap Diplomacy) को बेअसर करने के लिए भारत ने निम्नलिखित कूटनीतिक उपाय किए हैं:

1. 'नेकलेस ऑफ डायमंड्स' (Necklace of Diamonds) रणनीति

यह चीन के नौसैनिक अड्डों को प्रतिसंतुलित (Counterbalance) करने के लिए भारत द्वारा तैयार की गई एक जवाबी रणनीति है। इसके तहत भारत रणनीतिक बंदरगाहों तक अपनी सैन्य और व्यापारिक पहुँच सुनिश्चित कर रहा है:

  • चाबहार बंदरगाह (ईरान): पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को बायपास करते हुए मध्य एशिया तक पहुँच।

  • सबांग (इंडोनेशिया) और चांगी (सिंगापुर): मलक्का जलडमरूमध्य (Chokepoint) पर निगरानी रखने की सामरिक बढ़त।

  • डुक्म (ओमान): पश्चिमी हिंद महासागर में भारतीय नौसेना की लॉजिस्टिक आपूर्ति को सुदृढ़ करना।

2. संस्थागत और बहुपक्षीय गठजोड़

  • क्वाड (QUAD): अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक 'स्वतंत्र, खुले और समावेशी' (Free and Open Indo-Pacific) समुद्री ढाँचे की वकालत कर रहा है।

  • 'सागर' (SAGAR) विजन: 'क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास' के विजन के तहत भारत मालदीव, मॉरीशस और सेशेल्स जैसे द्वीपीय देशों को कोस्टल रडार सिस्टम और रक्षा सहायता प्रदान कर 'प्रथम उत्तरदाता' (First Responder) की भूमिका निभा रहा है।

बिहार के संदर्भ में सामरिक और आर्थिक निहितार्थ

यद्यपि बिहार सीधे तौर पर चीन या समुद्र तट से सीमा साझा नहीं करता, परंतु इस भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का राज्य पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। बिहार की नेपाल के साथ खुली और संवेदनशील सीमा इसे चीन के बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव (जैसे बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव - BRI) के प्रति सुभेद्य बनाती है। भारत की सुदृढ़ 'पड़ोसी प्रथम' (Neighborhood First) नीति और नेपाल के साथ सकारात्मक कूटनीतिक सामंजस्य, पटना और सभी बिहार के जिलों की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने, जल प्रबंधन (कोसी-गंडक बैराज के माध्यम से बाढ़ नियंत्रण) और अनधिकृत गतिविधियों को रोकने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इसके अतिरिक्त, हिंद महासागर में सुरक्षित समुद्री मार्ग (चीन के एकाधिकार को रोककर) यह सुनिश्चित करते हैं कि बिहार के कृषि और MSME क्षेत्रों को उर्वरकों एवं कच्चे माल की निर्बाध आपूर्ति प्राप्त हो सके, जो राज्य के समावेशी विकास के लिए अपरिहार्य है।

आगे की राह (Way Forward)

भारत की विदेश नीति अब रक्षात्मक (Defensive) रुख से आगे बढ़कर 'सक्रिय और मुखर' (Proactive and Assertive) हो चुकी है। चीन के 'बिना युद्ध जीते' (Winning without fighting) के दर्शन का मुकाबला करने के लिए भारत को निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:

  • नौसैनिक आधुनिकीकरण: अपनी नौसेना को एक वास्तविक 'ब्लू वाटर नेवी' (Blue Water Navy) में परिवर्तित करने के लिए परमाणु पनडुब्बियों और समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA) में निवेश बढ़ाना।

  • आर्थिक आत्मनिर्भरता: 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chains) के लिए चीन पर निर्भरता को कम करना, विशेषकर सक्रिय दवा सामग्री (APIs) और दुर्लभ मृदा धातुओं (Rare Earth Elements) के संदर्भ में।

  • 'प्रोजेक्ट मौसम' और आर्थिक एकीकरण: विकासशील देशों में चीन के अपारदर्शी निवेश के विकल्प के रूप में पारदर्शी और ऋण-मुक्त बुनियादी ढांचा परियोजनाएं विकसित करना।

भारत को अपनी कूटनीतिक साझेदारी, आर्थिक विकास और सैन्य निवारक (Military Deterrence) क्षमता के बीच एक इष्टतम तालमेल बनाए रखना होगा, ताकि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन भारत के पक्ष में सुनिश्चित किया जा सके।

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