नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में भारत की पहल का वर्णन करें। राष्ट्रीय सौर मिशन की उपलब्धियां क्या हैं?

 Q. नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में भारत की पहल का वर्णन करें। राष्ट्रीय सौर मिशन की उपलब्धियां क्या हैं?

Ans - 

नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की पहल और राष्ट्रीय सौर मिशन की उपलब्धियां

भूमिका

जीवाश्म ईंधनों की सीमित उपलब्धता और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते वैश्विक संकट के कारण, नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) धारणीय विकास (Sustainable Development) का एक अनिवार्य विकल्प बन गई है। भारत ने COP-26 (ग्लासगो) सम्मेलन में 'पंचामृत' रणनीति प्रस्तुत करते हुए वर्ष 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने और 2070 तक 'नेट-जीरो' (Net-Zero) उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के वर्ष 2026 के नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, भारत की कुल स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता लगभग 282.7 GW तक पहुँच गई है, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा और सौर क्षमता दोनों में शीर्ष अग्रणी देशों में स्थापित हो गया है।

नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की प्रमुख पहलें

ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) को गति देने के लिए भारत सरकार ने नीतिगत, ढांचागत और वित्तीय स्तर पर बहुआयामी पहलें की हैं:

  • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance - ISA):

    कर्क और मकर रेखा के मध्य स्थित देशों को सौर ऊर्जा के दोहन के लिए एकजुट करने हेतु भारत और फ्रांस द्वारा 2015 में स्थापित यह गठबंधन, वैश्विक जलवायु कूटनीति में भारत के नेतृत्व को दर्शाता है। इसका मुख्यालय गुरुग्राम में स्थित है।

  • नवीनतम योजनाएं और नीतियां:

    • पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना (PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana): फरवरी 2024 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य देश के 1 करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित कर उन्हें 300 यूनिट मुफ्त बिजली प्रदान करना है।

    • पीएम-कुसुम (PM-KUSUM): यह योजना किसानों को डीजल पंपों से मुक्त कर सौर पंप स्थापित करने और अतिरिक्त सौर ऊर्जा को ग्रिड में बेचकर आर्थिक लाभ कमाने का अवसर प्रदान कर रही है।

  • अवसंरचना विकास (Infrastructure Development):

    • ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर: नवीकरणीय ऊर्जा को राष्ट्रीय ग्रिड के साथ सुचारू रूप से एकीकृत (Integrate) करने के लिए अंतर-राज्यीय पारेषण (Transmission) नेटवर्क का निर्माण किया जा रहा है।

    • विशाल सौर पार्क (Solar Parks): 'अल्ट्रा मेगा सोलर पावर प्रोजेक्ट्स' के तहत बड़े स्तर पर पार्कों का निर्माण किया जा रहा है। राजस्थान का भादला सोलर पार्क (Bhadla Solar Park) दुनिया के सबसे बड़े सौर पार्कों में से एक है।

  • उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI Scheme):

    सौर पीवी मॉड्यूल (Solar PV Modules) के निर्माण में चीन पर आयात निर्भरता कम करने और 'आत्मनिर्भर भारत' को बढ़ावा देने के लिए 'उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल' के लिए PLI योजना लागू की गई है।

राष्ट्रीय सौर मिशन (National Solar Mission - NSM) की उपलब्धियां

राष्ट्रीय सौर मिशन की शुरुआत जनवरी 2010 में जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) के तहत की गई थी। इसके मुख्य परिणाम और उपलब्धियां निम्नलिखित हैं:

  • क्षमता विस्तार में अभूतपूर्व वृद्धि:

    मिशन के तहत प्रारंभ में 2022 तक 20 GW सौर ऊर्जा का लक्ष्य रखा गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 100 GW कर दिया गया। भारत ने इस लक्ष्य को सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिया है और जुलाई 2026 तक भारत की कुल स्थापित सौर क्षमता 164.59 GW को पार कर चुकी है।

  • ग्रिड पैरिटी (Grid Parity) की प्राप्ति:

    मिशन के आरंभ (2010) में सौर ऊर्जा की दर लगभग 17 रुपये प्रति यूनिट थी। वृहत पैमाने पर उत्पादन और रिवर्स नीलामी (Reverse Auction) की नीति के कारण वर्तमान में यह दर 2.5 रुपये प्रति यूनिट के आसपास आ गई है, जो कोयला आधारित बिजली से भी सस्ती है।

  • रूफटॉप और ऑफ-ग्रिड सौर ऊर्जा का विकास:

    औद्योगिक इकाइयों से लेकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक, स्ट्रीट लाइट, सोलर स्टडी लैंप और मिनी-ग्रिड के माध्यम से ऊर्जा पहुँच (Energy Access) सुनिश्चित की गई है।

बिहार के संदर्भ में नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार

बिहार जैसे घनी आबादी और कृषि-प्रधान राज्य में ऊर्जा सुरक्षा और रोजगार सृजन के लिए नवीकरणीय ऊर्जा अत्यंत महत्वपूर्ण है:

  • जल-जीवन-हरियाली अभियान: राज्य सरकार का यह प्रमुख कार्यक्रम ऊर्जा संरक्षण और सरकारी भवनों पर रूफटॉप सोलर लगाने को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित कर रहा है।

  • तैरते सौर ऊर्जा संयंत्र (Floating Solar Power Plants): भूमि अधिग्रहण की चुनौती से निपटने के लिए बिहार ने दरभंगा (कादिराबाद) और सुपौल में तालाबों के ऊपर अपनी पहली फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएं सफलतापूर्वक स्थापित की हैं।

  • कजरा और पीरपैंती परियोजनाएं: लखीसराय के कजरा और भागलपुर के पीरपैंती में ताप विद्युत संयंत्रों के मूल प्रस्ताव को रद्द कर, अब वहां 'बैटरी स्टोरेज' (BESS) के साथ बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। यह राज्य के हरित ऊर्जा संक्रमण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

प्रमुख चुनौतियां

  • आयात निर्भरता: सौर सेल, वेफर्स और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के लिए अभी भी चीन जैसे देशों पर अत्यधिक निर्भरता है।

  • ग्रिड एकीकरण (Grid Integration): सौर और पवन ऊर्जा की प्रकृति अस्थिर (Intermittent) होती है, जिसके लिए मजबूत बैटरी स्टोरेज सिस्टम (BESS) का अभाव राष्ट्रीय ग्रिड की स्थिरता के लिए जोखिम है।

  • भूमि अधिग्रहण और ई-कचरा: बड़े सौर पार्कों के लिए उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण और पुराने हो चुके सोलर पैनलों (E-Waste) के सुरक्षित निपटान की कोई स्पष्ट नीति नहीं है।

आगे की राह (Way Forward)

भारत को एक वैश्विक हरित ऊर्जा महाशक्ति बनाने के लिए अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश बढ़ाना अनिवार्य है। लिथियम-आयन बैटरी के विकल्पों (जैसे सोडियम-आयन या ग्रीन हाइड्रोजन) के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, कृषि और सौर ऊर्जा के सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने के लिए 'एग्रीवोल्टिक्स' (Agrivoltaics) को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

संक्रमणकालीन चरण में नवीकरणीय ऊर्जा केवल जलवायु शमन का उपकरण नहीं है, बल्कि यह सतत विकास लक्ष्य-7 (SDG-7: सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा) को प्राप्त करते हुए भारत की ऊर्जा संप्रभुता को अक्षुण्ण रखने का सबसे सशक्त माध्यम है।

🛍️ ऑनलाइन शॉपिंग करें
Amazon, Flipkart, Myntra और AJIO पर खरीदारी करें
यहाँ से खरीदारी करने पे एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिल सकता है।
Next Post Previous Post
हमसे जुड़ें
1