भारत की 'एक्ट ईस्ट' (Act East) नीति पूर्वोत्तर राज्यों के विकास के लिए कैसे महत्वपूर्ण है?
Q. भारत की 'एक्ट ईस्ट' (Act East) नीति पूर्वोत्तर राज्यों के विकास के लिए कैसे महत्वपूर्ण है?
Ans -
'एक्ट ईस्ट' नीति और पूर्वोत्तर भारत: एक रणनीतिक सहजीविता
वर्ष 2014 में भारत सरकार द्वारा 'लुक ईस्ट' (Look East) नीति को 'एक्ट ईस्ट' (Act East) नीति में उन्नत किया गया। यह नीति केवल दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका भौगोलिक और रणनीतिक केंद्र भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र (North Eastern Region - NER) है। ऐतिहासिक रूप से 'भूगोल की परिधि' (Geographical Periphery) माने जाने वाले पूर्वोत्तर को इस नीति के तहत आसियान (ASEAN) और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का 'प्रवेश द्वार' (Gateway) घोषित किया गया है।
पूर्वोत्तर राज्यों के विकास में 'एक्ट ईस्ट' नीति की बहुआयामी प्रासंगिकता
'एक्ट ईस्ट' नीति ने पूर्वोत्तर भारत के विकास को एक नया प्रतिमान (Paradigm Shift) प्रदान किया है, जिसका PESTLE दृष्टिकोण के अंतर्गत निम्नलिखित विश्लेषण किया जा सकता है:
आर्थिक और वाणिज्यिक एकीकरण (Economic):
सीमा व्यापार (Border Trade): म्यांमार और बांग्लादेश के साथ 'बॉर्डर हाट' (Border Haats) की स्थापना से स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिली है।
जैविक कृषि और निर्यात: सिक्किम (पूर्ण जैविक राज्य) और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के बांस, चाय और रबर उत्पादों को आसियान बाज़ारों तक पहुँच प्राप्त हो रही है, जो नीति आयोग के 'पूर्वोत्तर विजन' के अनुरूप है।
अवसंरचनात्मक और संपर्क (Infrastructure/Technological):
नीति का मूल मंत्र कनेक्टिविटी है। इसे सतत विकास लक्ष्य-9 (SDG-9: अवसंरचना और औद्योगीकरण) के साथ संरेखित किया गया है।
| प्रमुख अवसंरचना परियोजना | संबद्ध देश | रणनीतिक एवं आर्थिक प्रभाव |
| कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट प्रोजेक्ट | म्यांमार | कोलकाता बंदरगाह को सिटवे (Sittwe) से जोड़ना; सिलीगुड़ी कॉरिडोर (Chicken's Neck) पर निर्भरता में कमी। |
| भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग | म्यांमार, थाईलैंड | आसियान (ASEAN) बाज़ारों तक निर्बाध सड़क संपर्क और पर्यटन को बढ़ावा। |
| अगरतला-अखौरा रेल लिंक | बांग्लादेश | त्रिपुरा और बांग्लादेश के बीच रेलवे संपर्क, माल ढुलाई की लागत में भारी कमी। |
राजनीतिक और रणनीतिक लाभ (Political & Strategic):
आंतरिक सुरक्षा में सुधार: म्यांमार और बांग्लादेश के साथ गहरे रक्षा और कूटनीतिक सहयोग (जैसे- ऑपरेशन सनराइज) के कारण पूर्वोत्तर में उग्रवादी गुटों (Insurgent groups) के सुरक्षित ठिकानों को नष्ट करने में अभूतपूर्व सफलता मिली है।
चीन के प्रभाव का संतुलन: इंडो-पैसिफिक विजन के तहत, पूर्वोत्तर में मजबूत बुनियादी ढांचा सीमावर्ती क्षेत्रों में चीन की आक्रामक नीतियों के विरुद्ध एक रणनीतिक निवारक (Strategic Deterrence) का कार्य करता है।
सामाजिक-सांस्कृतिक कूटनीति (Socio-Cultural):
दक्षिण-पूर्व एशिया और पूर्वोत्तर भारत के बीच गहरी जातीय, भाषाई और बौद्ध धर्म (Buddhism) से जुड़ी सांस्कृतिक समानताएं हैं। 'सांस्कृतिक कूटनीति' (Cultural Diplomacy) के माध्यम से इको-टूरिज्म और हेरिटेज टूरिज्म को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार प्राप्त हो रहा है।
विद्यमान चुनौतियाँ
भौगोलिक और पर्यावरणीय बाधाएँ: जटिल पर्वतीय भूभाग और भारी वर्षा के कारण अवसंरचना परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अत्यधिक विलंब होता है (Cost and Time Overrun)।
म्यांमार में राजनीतिक अस्थिरता: म्यांमार में सैन्य तख्तापलट (Coup) और गृहयुद्ध के कारण कलादान और त्रिपक्षीय राजमार्ग जैसी प्रमुख परियोजनाएं बाधित हुई हैं और मिजोरम-मणिपुर में शरणार्थी संकट (Refugee Crisis) उत्पन्न हुआ है।
संस्थागत अड़चनें: भूमि अधिग्रहण के मुद्दे और कुछ क्षेत्रों में AFSPA (सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम) की उपस्थिति निवेशकों के विश्वास को प्रभावित करती है।
आगे की राह (Way Forward)
पूर्वोत्तर का विकास भारत की वैश्विक महाशक्ति बनने की पूर्वशर्त है। परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए 'एक्ट ईस्ट' को 'एक्ट फास्ट' (Act Fast) में परिवर्तित करने की आवश्यकता है। द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2nd ARC) की अनुशंसाओं के आलोक में सीमा प्रबंधन को अधिक कुशल और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।
'वसुधैव कुटुंबकम' के दर्शन को आत्मसात करते हुए, पूर्वोत्तर राज्यों को केवल 'पारगमन क्षेत्र' (Transit Zone) नहीं, बल्कि एक जीवंत आर्थिक केंद्र (Economic Hub) के रूप में विकसित करना होगा। सुदृढ़, शांत और समृद्ध पूर्वोत्तर ही 'न्यू इंडिया 2047' और 'विकसित भारत' के संकल्प को यथार्थ में परिणत कर सकता है।