स्मार्ट सिटी मिशन के संदर्भ में भारत में अनियोजित शहरीकरण की समस्याओं पर चर्चा करें।
Q. स्मार्ट सिटी मिशन के संदर्भ में भारत में अनियोजित शहरीकरण की समस्याओं पर चर्चा करें।
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संयुक्त राष्ट्र की 'विश्व शहरीकरण संभावनाओं' (World Urbanization Prospects) रिपोर्ट के अनुसार, 2050 तक भारत की लगभग 50% आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करेगी। इस तीव्र जनसांख्यिकीय संक्रमण को सुव्यवस्थित करने और शहरों को 'आर्थिक विकास के इंजन' के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से 2015 में स्मार्ट सिटी मिशन (SCM) की शुरुआत की गई थी। इसका मूल उद्देश्य मुख्य बुनियादी ढांचा, स्वच्छ पर्यावरण और नागरिकों को बेहतर जीवन गुणवत्ता प्रदान करना था। हालांकि, मिशन की उपलब्धियों के बावजूद, अनियोजित शहरीकरण की संरचनात्मक और स्थानिक चुनौतियाँ भारतीय शहरों के लिए एक गंभीर संकट बनी हुई हैं।
अनियोजित शहरीकरण की बहुआयामी समस्याएं
भारत में अनियोजित शहरीकरण के कारण उत्पन्न होने वाली चुनौतियों को निम्नलिखित आयामों में समझा जा सकता है:
1. अवसंरचनात्मक और प्रशासनिक चुनौतियाँ
बुनियादी ढांचे पर दबाव: अनियंत्रित प्रवास के कारण सार्वजनिक परिवहन, जल आपूर्ति और ठोस कचरा प्रबंधन (Solid Waste Management) व्यवस्था चरमरा गई है।
मलिन बस्तियों (Slums) का विस्तार: विश्व बैंक के अनुसार, भारत की एक बड़ी शहरी आबादी मलिन बस्तियों में रहती है (जैसे मुंबई का धारावी), जहाँ नागरिक सुविधाओं का नितांत अभाव है।
कमजोर शहरी स्थानीय निकाय (ULBs): 74वें संविधान संशोधन के बावजूद, नगरपालिकाओं के पास वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता (3Fs - Funds, Functions, Functionaries) का अभाव है। 15वें वित्त आयोग ने भी ULBs की दयनीय राजस्व सृजन क्षमता पर चिंता व्यक्त की है।
2. पर्यावरणीय संकट (Environmental Degradation)
शहरी बाढ़ और जलभराव: आर्द्रभूमियों (Wetlands) के अतिक्रमण और अवैज्ञानिक जल निकासी प्रणालियों के कारण चेन्नई, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में शहरी बाढ़ एक वार्षिक आपदा बन गई है।
अर्बन हीट आइलैंड (Urban Heat Island - UHI): कंक्रीट के अत्यधिक उपयोग और हरित आवरण की कमी से शहरों का तापमान आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है।
वायु और जल प्रदूषण: अनियोजित औद्योगिक और आवासीय मिश्रण के कारण दिल्ली और कानपुर जैसे शहर WHO के वायु गुणवत्ता सूचकांक में लगातार निचले पायदान पर रहते हैं।
3. सामाजिक-आर्थिक असमानता
रहने योग्य आवास का अभाव: रियल एस्टेट की बढ़ती कीमतों ने शहरी गरीबों को परिधि (Periphery) में धकेल दिया है, जिससे 'शहरी फैलाव' (Urban Sprawl) की समस्या उत्पन्न हुई है।
स्वास्थ्य और शिक्षा तक पहुंच: अनियोजित बसावटों में संचारी रोगों का प्रसार तेजी से होता है, और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं जनसांख्यिकीय दबाव को झेलने में अक्षम साबित हो रही हैं।
स्मार्ट सिटी मिशन के संदर्भ में मूल्यांकन: चुनौतियाँ और सीमाएँ
यद्यपि स्मार्ट सिटी मिशन ने तकनीकी एकीकरण (जैसे इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर - ICCC) में सफलता प्राप्त की है, फिर भी यह अनियोजित शहरीकरण की मूल समस्याओं को पूरी तरह हल करने में सीमित रहा है:
'एरिया-बेस्ड डेवलपमेंट' (ABD) बनाम समग्र विकास: SCM का 80% से अधिक बजट शहर के एक छोटे हिस्से (ABD) के विकास पर केंद्रित रहा है। इसने शहर के भीतर ही 'उत्कृष्टता के द्वीपों' (Islands of Excellence) का निर्माण किया है, जबकि शहर का शेष हिस्सा बुनियादी सुविधाओं से वंचित रह गया।
तकनीक पर अति-निर्भरता: मिशन ने 'स्मार्ट' समाधानों (जैसे स्मार्ट मीटर, वाई-फाई) पर अधिक ध्यान दिया, लेकिन जल निकासी, सीवरेज और किफायती आवास जैसी मूलभूत आधारभूत संरचनाओं की अनदेखी की।
विशेष प्रयोजन वाहन (SPVs) से लोकतांत्रिक घाटा: SCM के कार्यान्वयन के लिए बनाए गए SPVs ने निर्वाचित स्थानीय निकायों (ULBs) की शक्तियों को दरकिनार कर दिया है, जो द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2nd ARC) की विकेंद्रीकरण की भावना के विरुद्ध है।
रणनीतिक रूपरेखा और आगे की राह
अनियोजित शहरीकरण की चुनौतियों को हल करने के लिए एक समावेशी और दूरदर्शी दृष्टिकोण की आवश्यकता है:
समग्र शहरी नियोजन: 'मास्टर प्लान' को केवल भूमि-उपयोग तक सीमित न रखकर, इसमें पर्यावरणीय स्थिरता और आपदा प्रबंधन को भी एकीकृत करना चाहिए। अमृत 2.0 (AMRUT 2.0) और SCM के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक है।
वित्तीय सशक्तिकरण: नगर पालिकाओं को म्युनिसिपल बॉन्ड (Municipal Bonds) जारी करने और संपत्ति कर के वैज्ञानिक मूल्यांकन के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
'स्पंज सिटीज़' (Sponge Cities) की अवधारणा: चीन की तर्ज पर शहरी बाढ़ से निपटने के लिए पारगम्य फुटपाथ, वर्षा जल संचयन और नीले-हरे बुनियादी ढांचे (Blue-Green Infrastructure) का निर्माण किया जाना चाहिए।
प्रवास का प्रबंधन: ग्रामीण-शहरी पलायन को कम करने के लिए श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन (Rurban) मिशन को अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
शहर भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 70% का योगदान करते हैं। अतः, अनियोजित शहरीकरण की चुनौतियों से पार पाना केवल अवसंरचना का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह आर्थिक उत्पादकता का भी प्रश्न है। सतत विकास लक्ष्य 11 (SDG 11 - समावेशी, सुरक्षित, लचीले और संवहनीय शहर) की प्राप्ति और 'विकसित भारत @2047' के विजन को साकार करने के लिए, भारतीय शहरों को केवल 'तकनीकी रूप से स्मार्ट' ही नहीं, बल्कि 'सामाजिक और पारिस्थितिक रूप से भी जीवंत' बनाना होगा।