भारत में जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाने के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा के बुनियादी ढांचे में निवेश क्यों महत्वपूर्ण है?

 Q. भारत में जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाने के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा के बुनियादी ढांचे में निवेश क्यों महत्वपूर्ण है?

Ans -

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) के अनुसार, जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) उस आर्थिक विकास क्षमता को संदर्भित करता है, जो किसी देश की जनसंख्या की आयु संरचना में बदलाव के परिणामस्वरूप उत्पन्न होती है। वर्तमान में, भारत अपनी जनसांख्यिकीय खिड़की के स्वर्ण काल से गुजर रहा है। देश की लगभग 65% आबादी कार्यशील आयु (15-59 वर्ष) के अंतर्गत आती है और राष्ट्रीय औसत आयु मात्र 28 वर्ष है।

इस अभूतपूर्व जनसांख्यिकीय अवसर को वास्तविक आर्थिक प्रगति में बदलने के लिए मानव पूंजी— विशेषकर स्वास्थ्य और शिक्षा अवसंरचना— में निवेश नितांत आवश्यक है, अन्यथा यह अवसर एक 'जनसांख्यिकीय आपदा' (Demographic Disaster) में परिवर्तित हो सकता है।

जनसांख्यिकीय लाभांश हेतु शिक्षा अवसंरचना की प्रासंगिकता

शिक्षा मात्र साक्षरता का साधन नहीं, बल्कि तकनीकी दक्षता और नवाचार की आधारशिला है। इसका आर्थिक और सामाजिक महत्व बहुआयामी है:

  • कौशल विकास और रोजगार योग्यता: इंडिया स्किल्स रिपोर्ट 2024 के अनुसार, भारत में केवल लगभग आधी युवा आबादी ही सीधे तौर पर उद्योग-जगत के लिए रोजगार योग्य है। अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं (STEM Education) और डिजिटल बुनियादी ढांचे में निवेश से कार्यबल को चौथी औद्योगिक क्रांति (Industry 4.0) के अनुकूल बनाया जा सकता है।

  • नवाचार और शोध (R&D) में वृद्धि: नवाचार सूचकांकों में अग्रणी बनने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों को विश्वस्तरीय शोध केंद्रों में ढालना अनिवार्य है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 द्वारा प्रस्तावित बहु-विषयक दृष्टिकोण और 'राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन' (NRF) की स्थापना इसी दिशा में केंद्रित है।

  • सामाजिक गतिशीलता और समता: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा गरीबी के दुष्चक्र को तोड़ती है। यह अनुच्छेद 21A (शिक्षा का अधिकार) के वास्तविक लक्ष्यों को प्राप्त कर वंचित वर्गों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ती है।

स्वास्थ्य अवसंरचना में निवेश की अपरिहार्यता

विश्व बैंक के मानव पूंजी सूचकांक (HCI) के अनुसार, एक स्वस्थ कार्यबल ही किसी राष्ट्र की स्थायी संपत्ति होता है:

  • श्रम उत्पादकता में वृद्धि: कुपोषण और रक्ताल्पता (एनीमिया) कार्यबल की संज्ञानात्मक और शारीरिक क्षमता को गंभीर रूप से क्षीण करते हैं (राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के आंकड़े इसे एक प्रमुख चुनौती बताते हैं)। सुदृढ़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHCs) और पीएम आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (PM-ABHIM) एक उत्पादक कार्यबल का निर्माण सुनिश्चित करते हैं।

  • जेब से होने वाले खर्च (OOPE) में कमी: जब सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना मजबूत होती है, तो नागरिकों का अनपेक्षित चिकित्सा व्यय (Out-of-Pocket Expenditure) कम होता है। इससे परिवारों की बचत बढ़ती है, जो अंततः अर्थव्यवस्था में मांग और निवेश को गति देती है।

  • बीमारियों के बोझ (Burden of Disease) का प्रबंधन: गैर-संचारी रोगों (NCDs) के बढ़ते प्रकोप को रोकने के लिए निवारक देखभाल और उन्नत टेलीमेडिसिन अवसंरचना (जैसे ई-संजीवनी) आवश्यक है, ताकि कार्यशील आयु वर्ग दीर्घायु और सक्रिय रहे।

सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के साथ अंतर्संबंध

निवेश का क्षेत्रप्रभाव एवं परिणामसंबंधित वैश्विक लक्ष्य
स्वास्थ्य (Health)मातृ/शिशु मृत्यु दर में कमी, स्वस्थ कार्यबल, महामारी से बचावSDG 3 (उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली)
शिक्षा (Education)रोजगार योग्यता, संज्ञानात्मक विकास, लैंगिक समानताSDG 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा)
समग्र परिणामजनसांख्यिकीय लाभांश की प्राप्ति, समावेशी विकासSDG 8 (उचित कार्य और आर्थिक वृद्धि)

आगे की राह

  • बजट आवंटन में वृद्धि: 15वें वित्त आयोग और आर्थिक सर्वेक्षण की संस्तुतियों के अनुरूप, सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय को जीडीपी के 2.5-3% तक और शिक्षा व्यय को 6% तक बढ़ाने की प्रतिबद्धता को शीघ्रातिशीघ्र धरातल पर उतारा जाना चाहिए।

  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP): टियर-2 और टियर-3 शहरों में अस्पताल और तकनीकी संस्थान स्थापित करने के लिए 'वायबिलिटी गैप फंडिंग' (VGF) के माध्यम से निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता का एकीकरण किया जाए।

  • गुणवत्ता पर ध्यान (Quality over Quantity): स्कूल नामांकन दर बढ़ाने के साथ-साथ 'लर्निंग आउटकम्स' (असर रिपोर्ट - ASER की तर्ज पर) और 'स्किल-मिसमैच' को सुधारने के लिए उद्योग-अकादमिक लिंकेज को मजबूत किया जाए।

भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश एक सीमित समय (Time-bound) का अवसर है, जो अगले दो से तीन दशकों तक ही उपलब्ध रहेगा। स्वास्थ्य और शिक्षा में किया गया निवेश व्यय नहीं, बल्कि सर्वोच्च आर्थिक रिटर्न देने वाला रणनीतिक अस्त्र है। इन क्षेत्रों में दूरदर्शी नीतियां और सुदृढ़ अवसंरचना ही भारत को 'अमृत काल' में एक ज्ञान आधारित और लचीली अर्थव्यवस्था बनाएंगी, जो 'विकसित भारत @ 2047' के संकल्प को सिद्ध करने में आधारस्तंभ का कार्य करेगी।

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