राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के प्रमुख स्तंभों और इसके कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों की विवेचना करें।

 Q. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के प्रमुख स्तंभों और इसके कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों की विवेचना करें।

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020, डॉ. के. कस्तूरीरंगन समिति की सिफारिशों पर आधारित, 21वीं सदी की पहली शिक्षा नीति है जिसने 34 वर्ष पुरानी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1986) को प्रतिस्थापित किया है। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन लाकर भारत को एक 'वैश्विक ज्ञान महाशक्ति' (Global Knowledge Superpower) के रूप में स्थापित करना है। यह नीति सतत विकास लक्ष्य-4 (SDG-4) के अनुरूप समावेशी, न्यायसंगत और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने तथा अनुच्छेद 21A (शिक्षा का अधिकार) के वास्तविक लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रमुख स्तंभ

नीति का संपूर्ण ढांचा पाँच मूलभूत स्तंभों— पहुँच (Access), समता (Equity), गुणवत्ता (Quality), सामर्थ्य (Affordability) और उत्तरदायित्व (Accountability)— पर टिका है। इसके संरचनात्मक और अकादमिक स्तंभों को निम्नलिखित रूप में देखा जा सकता है:

1. स्कूली शिक्षा का नया ढांचा

  • 5+3+3+4 संरचना: पुरानी 10+2 प्रणाली को बदलकर, आयु वर्ग 3-18 वर्ष के लिए एक नई संरचना लागू की गई है जिसमें 3 वर्ष की आंगनवाड़ी/प्री-स्कूलिंग (ECCE) शामिल है।

  • बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान (FLN): कक्षा 3 तक के सभी बच्चों के लिए मूलभूत साक्षरता सुनिश्चित करना (निपुण भारत मिशन - NIPUN Bharat)।

  • मूल्यांकन में सुधार: रटने की प्रवृत्ति को कम करने के लिए रचनात्मक मूल्यांकन प्रणाली और राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र 'परख' (PARAKH) की स्थापना।

2. उच्च शिक्षा में बहु-विषयक दृष्टिकोण (Multidisciplinary Approach)

  • सकल नामांकन अनुपात (GER): उच्च शिक्षा में GER को वर्ष 2035 तक 50% तक बढ़ाने का लक्ष्य (वर्तमान में लगभग 27-28%)।

  • लचीलापन (Multiple Entry & Exit): छात्रों को अपनी सुविधानुसार कोर्स बीच में छोड़ने और पुनः जुड़ने की स्वतंत्रता; इसके लिए 'अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट' (Academic Bank of Credit - ABC) का निर्माण।

  • एकल नियामक: चिकित्सा और कानूनी शिक्षा को छोड़कर, संपूर्ण उच्च शिक्षा के लिए भारतीय उच्च शिक्षा आयोग (HECI) का गठन।

3. भाषाई विविधता और समावेशन

  • कक्षा 5 (संभव हो तो कक्षा 8 तक) तक शिक्षा का माध्यम मातृभाषा/स्थानीय भाषा/क्षेत्रीय भाषा रखने पर जोर, ताकि संज्ञानात्मक विकास बेहतर हो सके।

  • दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष प्रावधान और 'सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूहों' (SEDGs) के लिए 'जेंडर इंक्लूजन फंड' (Gender Inclusion Fund) की स्थापना।

कार्यान्वयन में आने वाली बहुआयामी चुनौतियाँ

यद्यपि NEP 2020 का विजन अत्यंत प्रगतिशील है, परंतु इसके व्यावहारिक धरातल पर क्रियान्वयन में कई কাঠात्मक (Structural) और प्रशासनिक बाधाएँ मौजूद हैं:

1. आर्थिक एवं ढांचागत चुनौतियाँ (Economic Challenges)

  • वित्तीय आवंटन: नीति शिक्षा क्षेत्र में GDP का 6% निवेश करने का लक्ष्य रखती है, जबकि वर्तमान में यह लगभग 2.9% से 3.1% के मध्य ही सीमित है (आर्थिक सर्वेक्षण के आँकड़े)।

  • डिजिटल डिवाइड: शिक्षा के डिजिटलीकरण और ई-लर्निंग पर जोर ग्रामीण भारत में प्रासंगिक नहीं हो पाता, क्योंकि इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्मार्ट उपकरणों की भारी कमी है (NSSO के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 15-20% घरों में ही इंटरनेट सुविधा है)।

2. राजनीतिक और संघीय चुनौतियाँ (Federal Challenges)

  • शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय है। केंद्र द्वारा बनाई गई इस नीति को लागू करने के लिए राज्यों की सहमति और सहयोग अनिवार्य है।

  • भाषाई नीति और केंद्रीकरण के आरोपों के कारण तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे कुछ राज्यों ने इसके कार्यान्वयन पर सैद्धांतिक आपत्तियां दर्ज की हैं, जो 'सहकारी संघवाद' की परीक्षा है।

3. मानव संसाधन और क्षमता निर्माण (Human Resource)

  • शिक्षकों का अभाव एवं प्रशिक्षण: प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के पास आवश्यक शैक्षणिक प्रशिक्षण का अभाव है।

  • बहु-विषयक दृष्टिकोण को लागू करने के लिए वर्तमान शिक्षकों की मानसिकता और शिक्षण पद्धति (Pedagogy) को बदलना एक जटिल कार्य है।

4. तकनीकी और विनियामक चुनौतियाँ (Technological & Regulatory)

  • सैकड़ों विश्वविद्यालयों और हजारों कॉलेजों को बहु-विषयक संस्थानों (HEIs) में बदलना तथा अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (ABC) को तकनीकी रूप से निर्बाध बनाना डेटा सुरक्षा और सर्वर क्षमता के लिए बड़ी चुनौती है।

  • HECI जैसे एकल नियामक ढांचे के निर्माण से शक्तियों के अत्यधिक केंद्रीकरण की आशंका उत्पन्न होती है।

आगे की राह (Way Forward)

NEP 2020 को सफलता के शिखर तक ले जाने के लिए निम्नलिखित सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए:

  • संसाधन जुटाना: 6% GDP के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR), निजी निवेश और शिक्षा उपकर (Education Cess) का अनुकूलतम उपयोग किया जाना चाहिए।

  • सहकारी संघवाद को बढ़ावा: नीति को एक थोपे गए आदेश के बजाय 'सहयोगी मॉडल' पर लागू करना चाहिए। नीति आयोग राज्यों के साथ संवाद स्थापित करने के लिए 'शिक्षा समन्वय मंच' विकसित कर सकता है।

  • क्षमता निर्माण: शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए DIKSHA और NISHTHA जैसे कार्यक्रमों का विस्तार करते हुए, ब्लॉक स्तर पर 'टीचर मेंटरशिप प्रोग्राम' अनिवार्य किए जाएं।

  • चरणबद्ध क्रियान्वयन: संपूर्ण नीति को एक साथ लागू करने के बजाय, इसे पायलट प्रोजेक्ट्स और अल्पकालिक/दीर्घकालिक लक्ष्यों (Short-term/Long-term targets) में विभाजित कर लागू किया जाना चाहिए।

भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) तभी एक उत्पादक मानव पूंजी में परिणत होगा, जब शिक्षा व्यवस्था विश्वस्तरीय हो। NEP 2020 महज़ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि 'विकसित भारत @ 2047' (Viksit Bharat 2047) की नींव है। इसके सफल कार्यान्वयन से न केवल एक आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का निर्माण होगा, बल्कि 'वसुधैव कुटुंबकम' के मूल्यों से युक्त एक प्रबुद्ध वैश्विक नागरिक समाज की स्थापना भी संभव हो सकेगी।

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