महिलाओं के सशक्तिकरण में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण बिल) के महत्व का विश्लेषण करें।

 Q. महिलाओं के सशक्तिकरण में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण बिल) के महत्व का विश्लेषण करें।

Ans - 

106वें संविधान संशोधन अधिनियम (नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023) ने भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक युगांतरकारी अध्याय की शुरुआत की है। यह ऐतिहासिक विधान लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधानसभा में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण (एक-तिहाई सीटें) सुनिश्चित करता है। विश्व आर्थिक मंच (WEF) की 'ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट' में राजनीतिक सशक्तिकरण के मापदंडों में भारत की स्थिति को सुधारने तथा संविधान के अनुच्छेद 15(3) (महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान) और अनुच्छेद 39 के तहत परिकल्पित 'लैंगिक न्याय' (Gender Justice) को यथार्थ रूप देने में यह एक मील का पत्थर है।

'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' का बहुआयामी महत्व (Multidimensional Significance)

इस अधिनियम का महत्व केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के हर क्षेत्र में दूरगामी प्रभाव उत्पन्न करने की क्षमता रखता है। इसे निम्नलिखित आयामों में विश्लेषित किया जा सकता है:

1. राजनीतिक एवं लोकतांत्रिक सुदृढ़ीकरण (Political)

  • निर्णय-निर्माण में भागीदारी: भारतीय संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व ऐतिहासिक रूप से लगभग 14-15% रहा है, जो वैश्विक औसत (लगभग 26%) से काफी कम है। यह अधिनियम 'क्रिटिकल मास थ्योरी' (Critical Mass Theory) को चरितार्थ करते हुए महिलाओं की भागीदारी को निर्णायक स्तर तक ले जाएगा।

  • पितृसत्तात्मक राजनीति का विखंडन: यह अधिनियम 73वें और 74वें संविधान संशोधन (पंचायती राज और शहरी निकाय) की सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित कर, राजनीति में बाहुबल और धनबल (Muscle and Money power) के वर्चस्व को कम करने में सहायक होगा।

2. नीति-निर्माण एवं सुशासन (Governance & Policy Making)

  • संवेदनशील एवं समावेशी नीतियां: नोबेल पुरस्कार विजेता एस्थर डुफ्लो (Esther Duflo) के शोध से प्रमाणित होता है कि महिला नीति-निर्माता स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और स्वच्छ पेयजल जैसे जमीनी मुद्दों को अधिक प्राथमिकता देती हैं।

  • सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति: महिला नेतृत्व SDG 3 (उत्तम स्वास्थ्य), SDG 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) और SDG 6 (स्वच्छ जल एवं स्वच्छता) की दिशा में भारत की प्रगति को अभूतपूर्व गति प्रदान करेगा।

3. सामाजिक एवं सांस्कृतिक रूपांतरण (Social)

  • 'रोल मॉडल' प्रभाव (Role Model Effect): राष्ट्रीय स्तर पर महिला राजनेताओं की उपस्थिति युवा लड़कियों की आकांक्षाओं को नया आयाम देगी और समाज में महिलाओं की पारंपरिक भूमिकाओं (Stereotypes) से जुड़े पूर्वाग्रहों को तोड़ेगी।

  • महिला केंद्रित मुद्दों का समाधान: कन्या भ्रूण हत्या, घरेलू हिंसा, और कार्यस्थल पर उत्पीड़न जैसे संवेदनशील मुद्दों पर संसद में अधिक मुखरता से कानून निर्माण और उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सकेगा।

4. आर्थिक सशक्तिकरण एवं समानता (Economic)

  • जेंडर बजटिंग (Gender Budgeting) का विस्तार: अधिक महिला सांसदों की उपस्थिति से राष्ट्रीय और राज्य स्तर के बजट में महिलाओं के आर्थिक उत्थान, जैसे— महिला श्रम बल भागीदारी दर (FLFP) बढ़ाने और महिला उद्यमशीलता (MSME) को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों को प्राथमिकता मिलेगी।

कार्यान्वयन के समक्ष विद्यमान चुनौतियाँ

यद्यपि यह अधिनियम एक प्रगतिशील कदम है, परंतु इसके वास्तविक धरातल पर क्रियान्वयन में कई কাঠात्मक (Structural) बाधाएँ मौजूद हैं:

  • परिसीमन और जनगणना पर निर्भरता: इस अधिनियम का लागू होना आगामी जनगणना और उसके पश्चात होने वाले परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया से जुड़ा है, जिससे इसके त्वरित क्रियान्वयन में विलंब की आशंका है।

  • 'प्रॉक्सी' प्रतिनिधित्व का भय: स्थानीय निकायों में देखे गए 'सरपंच पति' (Proxy Representation) सिंड्रोम का राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उभरने का खतरा है, जहां वास्तविक सत्ता महिला जनप्रतिनिधि के पुरुष रिश्तेदारों के हाथ में केंद्रित रह सकती है।

  • राज्यसभा और विधान परिषदों में अछूता: यह आरक्षण उच्च सदनों (Rajya Sabha & Legislative Councils) में लागू नहीं होता, जो इसकी व्यापकता को कुछ हद तक सीमित करता है।

महत्व और प्रभाव का विश्लेषणात्मक निरूपण

आयाम (Dimension)वर्तमान स्थितिनारी शक्ति वंदन अधिनियम के संभावित प्रभाव
विधायी प्रतिनिधित्वसंसद में महिला सांसद ~15%प्रतिनिधित्व 33% तक सुनिश्चित होगा
नीतिगत प्राथमिकतारक्षा, अवसंरचना, वृहद अर्थशास्त्रशिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा और पोषण
वैश्विक स्थिति'जेंडर गैप' में राजनीतिक पिछड़ेपन का ठप्पाSDG 5 (लैंगिक समानता) में वैश्विक नेतृत्व

आगे की राह (Way Forward)

इस अधिनियम को मात्र एक प्रतीकात्मक विजय न मानकर, इसे वास्तविक सशक्तिकरण के साधन में बदलने के लिए निम्नलिखित सुधार आवश्यक हैं:

  • संवैधानिक और संस्थागत तत्परता: चुनाव आयोग (ECI) और परिसीमन आयोग को एक समयबद्ध रूपरेखा (Time-bound framework) के भीतर परिसीमन प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।

  • क्षमता निर्माण (Capacity Building): राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) और विभिन्न प्रशासनिक अकादमियों को प्रथम बार चुनी जाने वाली महिला जनप्रतिनिधियों के विधायी कौशल (Legislative drafting & Debating) को निखारने के लिए विशेष 'मेंटरशिप कार्यक्रम' चलाने चाहिए।

  • राजनीतिक दलों का आंतरिक लोकतंत्र: राजनीतिक दलों को महिलाओं को चुनाव लड़ने के लिए वित्तीय और संगठनात्मक समर्थन प्रदान करना चाहिए, जैसा कि द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2nd ARC) द्वारा सुशासन के संदर्भ में अनुशंसित है।

'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' केवल महिलाओं के विकास (Development of Women) का नहीं, अपितु 'महिला-नेतृत्व वाले विकास' (Women-led Development) की दिशा में एक स्पष्ट नीतिगत उद्घोष है। जब आधी आबादी देश की सर्वोच्च नीति-निर्माण संस्थाओं में अपनी न्यायसंगत जगह लेगी, तभी भारत 'विकसित भारत @ 2047' के लक्ष्य को पूर्ण सामर्थ्य के साथ प्राप्त कर सकेगा और 'वसुधैव कुटुंबकम' के मूल दर्शन के अनुरूप एक समतामूलक वैश्विक व्यवस्था का मार्ग प्रशस्त करेगा।

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