बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) के संदर्भ में भारत के प्रदर्शन का मूल्यांकन करें।
Q. बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) के संदर्भ में भारत के प्रदर्शन का मूल्यांकन करें।
Ans -
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल (OPHI) द्वारा विकसित बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) गरीबी को केवल आय के संकीर्ण चश्मे से देखने के बजाय, इसे स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर में व्याप्त अभावों के आधार पर मापता है।
हाल ही में नीति आयोग द्वारा जारी 'राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक: एक प्रगति समीक्षा' रिपोर्ट भारत की विकासात्मक यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि को रेखांकित करती है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने पिछले 9 वर्षों (2013-14 से 2022-23) में लगभग 24.82 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी के दुष्चक्र से बाहर निकाला है, जो सतत विकास लक्ष्य-1 (SDG-1: शून्य गरीबी) को निर्धारित समय-सीमा (2030) से पूर्व प्राप्त करने की दिशा में एक सशक्त कदम है।
भारत के प्रदर्शन का सकारात्मक मूल्यांकन (Positive Performance Evaluation)
भारत की बहुआयामी गरीबी दर वर्ष 2013-14 के 29.17% से घटकर 2022-23 में 11.28% रह गई है। इस अभूतपूर्व गिरावट के पीछे सरकारी नीतियों और लक्षित हस्तक्षेपों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है:
1. 'जीवन स्तर' (Standard of Living) संकेतकों में व्यापक सुधार
स्वच्छता एवं पेयजल: स्वच्छ भारत मिशन के तहत करोड़ों शौचालयों का निर्माण और जल जीवन मिशन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में नल से जल की आपूर्ति ने स्वच्छता (Sanitation) और पेयजल (Drinking Water) के अभाव को तीव्रता से कम किया है।
ईंधन एवं आवास: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन तक पहुंच सुनिश्चित की है, जबकि पीएम आवास योजना ने कच्चे और झुग्गी-झोपड़ी वाले आवासों की समस्या को काफी हद तक हल किया है।
वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion): प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) और JAM ट्रिनिटी (जन धन, आधार, मोबाइल) के माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) ने बिचौलियों को खत्म कर लक्षित वर्गों तक संसाधनों की पहुंच सुनिश्चित की है।
2. भौगोलिक समता (Geographical Equity) में वृद्धि
नीति आयोग के आंकड़ों के अनुसार, बहुआयामी गरीबी में सबसे तेज गिरावट उत्तर प्रदेश, बिहार (पटना और सभी जिलों सहित समग्र राज्य में) और मध्य प्रदेश जैसे उन राज्यों में दर्ज की गई है, जो ऐतिहासिक रूप से गरीबी के उच्च स्तर का सामना कर रहे थे। यह क्षेत्रीय असमानताओं में कमी और 'सहकारी संघवाद' की सफलता का स्पष्ट प्रमाण है।
बहुआयामी गरीबी सूचकांक: आयाम और भारत की नीतियां
| आयाम (Dimension) | भारांक (Weight) | प्रमुख संकेतक (Indicators) | भारत सरकार के प्रमुख हस्तक्षेप |
| स्वास्थ्य (Health) | 1/3 | पोषण, बाल/मातृ मृत्यु दर, मातृ स्वास्थ्य | पोषण अभियान, आयुष्मान भारत (PM-JAY), मिशन इंद्रधनुष |
| शिक्षा (Education) | 1/3 | स्कूली उपस्थिति, स्कूली शिक्षा के वर्ष | निपुण (NIPUN) भारत, समग्र शिक्षा अभियान, RTE अधिनियम |
| जीवन स्तर (Standard of Living) | 1/3 | स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास, संपत्ति | स्वच्छ भारत, सौभाग्य योजना, जल जीवन मिशन |
प्रदर्शन का आलोचनात्मक मूल्यांकन: विद्यमान चुनौतियाँ (Critical Analysis)
यद्यपि भारत ने मात्रात्मक रूप से शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन गुणात्मक और ढांचागत स्तर पर अभी भी कई गंभीर चुनौतियाँ विद्यमान हैं:
1. पोषण का संकट (Nutritional Challenges)
MPI में सबसे अधिक योगदान (लगभग एक-तिहाई) पोषण (Nutrition) के अभाव का है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के आंकड़े दर्शाते हैं कि 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में स्टंटिंग (Stunting - 35.5%) और महिलाओं में रक्ताल्पता (Anemia - 57%) की दर अभी भी चिंताजनक रूप से उच्च है। 'हिडेन हंगर' (सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी) एक बड़ी सामाजिक-आर्थिक चुनौती बनी हुई है।
2. शिक्षा की गुणवत्ता और लर्निंग आउटकम्स (Educational Quality)
भले ही स्कूलों में नामांकन दर (Enrollment Ratio) में वृद्धि हुई है, लेकिन प्रथम (Pratham) एनजीओ की ASER रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि ग्रामीण भारत में बच्चों के सीखने के परिणाम (Learning Outcomes) और बुनियादी साक्षरता स्तर अभी भी कमजोर हैं।
डिजिटल डिवाइड (Digital Divide) ने ग्रामीण और शहरी शिक्षा के मध्य एक नई खाई पैदा कर दी है।
3. असमानता और कमजोर वर्गों की भेद्यता (Inequality & Vulnerability)
गरीबी में कमी के बावजूद, अनुसूचित जनजाति (ST), अनुसूचित जाति (SC) और भूमिहीन खेतिहर मजदूरों के बीच बहुआयामी गरीबी का अनुपात राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है।
जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न होने वाली चरम मौसमी घटनाएं (जैसे बाढ़ और सूखा) सीमान्त किसानों को पुनः गरीबी के जाल में धकेलने (Slipping back into poverty) का जोखिम उत्पन्न करती हैं।
आगे की राह (Way Forward)
भारत को बहुआयामी गरीबी को पूर्णतः समाप्त करने और संविधान के अनुच्छेद 38 (कल्याणकारी राज्य) के आदर्शों को यथार्थ रूप देने के लिए निम्नलिखित बहुआयामी (PESTLE) दृष्टिकोण अपनाना चाहिए:
आउटकम-आधारित निगरानी (Outcome-based Monitoring): केवल बजटीय आवंटन (Outlays) पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, योजनाओं के जमीनी परिणामों (Outcomes) के मूल्यांकन के लिए 'डेटा-संचालित शासन' (Data-driven Governance) और सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) को अनिवार्य बनाया जाए।
पोषण सुरक्षा का विकेंद्रीकरण: पीडीएस (PDS) में मोटे अनाजों (Millets/Shree Anna) और फोर्टिफाइड चावल को शामिल करते हुए पोषण सुरक्षा को पंचायत स्तर पर विकेंद्रित किया जाना चाहिए।
क्षमता निर्माण और कौशल विकास: केवल अभावों को दूर करना पर्याप्त नहीं है; जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) का उपयोग करने के लिए युवाओं को इंडस्ट्री 4.0 के अनुकूल कौशल प्रदान करना अनिवार्य है।
बहुआयामी गरीबी सूचकांक में भारत का उत्कृष्ट प्रदर्शन कल्याणकारी राज्य की नीतियों की सफलता का परिचायक है। स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के बुनियादी ढांचे में निरंतर निवेश और लक्षित नीतिगत हस्तक्षेपों के माध्यम से ही भारत 'अंत्योदय' के दर्शन को पूर्णतः साकार कर सकेगा। यह समावेशी विकास न केवल 'विकसित भारत @ 2047' की आधारशिला रखेगा, बल्कि 'वसुधैव कुटुंबकम' के मूल्यों पर आधारित एक समतामूलक और सशक्त राष्ट्र के रूप में भारत को वैश्विक पटल पर स्थापित करेगा।