सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को बढ़ावा देने में नीति आयोग की भूमिका की चर्चा करें।
Q. सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को बढ़ावा देने में नीति आयोग की भूमिका की चर्चा करें।
Ans -
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 में भारत को 'राज्यों का संघ' (Union of States) घोषित किया गया है, जिसकी सफलता अंततः सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) पर ही निर्भर है। योजना आयोग के केंद्रीकृत ('Top-Down') दृष्टिकोण की विफलता के पश्चात, 1 जनवरी 2015 को नीति आयोग (NITI Aayog) की स्थापना एक राष्ट्रीय 'थिंक टैंक' के रूप में की गई। इसका मूल दर्शन यह है कि 'मजबूत राज्य ही एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण करते हैं'। यह संस्था विकेंद्रीकृत (Bottom-up) नीति-निर्माण को बढ़ावा देकर भारतीय संघीय ढांचे को एक नई दिशा प्रदान कर रही है।
सहकारी संघवाद को सुदृढ़ करने वाले संस्थागत तंत्र
नीति आयोग ने केंद्र और राज्यों के मध्य एकपक्षीय संवाद को समाप्त कर संस्थागत मंचों के माध्यम से नीति-निर्माण को सहभागी बनाया है:
| संस्थागत तंत्र | सहकारी संघवाद में भूमिका एवं प्रभाव |
| शासी परिषद (Governing Council) | इसमें सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल शामिल होते हैं। यह राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं (National Development Agenda) पर साझा सहमति बनाने का सर्वोच्च मंच है। |
| क्षेत्रीय परिषदें (Regional Councils) | एक से अधिक राज्यों को प्रभावित करने वाले विशिष्ट क्षेत्रीय मुद्दों (जैसे- वामपंथी उग्रवाद, पूर्वोत्तर का विकास) के समाधान हेतु गठित। |
| टीम इंडिया हब (Team India Hub) | यह केंद्र और राज्यों के मंत्रालयों के बीच एक 'इंटरफ़ेस' के रूप में कार्य करता है, जो राष्ट्रीय नीतियों में राज्यों की आवाज सुनिश्चित करता है। |
नीति आयोग की बहुआयामी भूमिका (विश्लेषणात्मक मूल्यांकन)
नीति आयोग ने विकासात्मक और प्रशासनिक रणनीति में व्यापक बदलाव किए हैं, जिन्हें बहुआयामी (PESTLE) दृष्टिकोण से समझा जा सकता है:
1. प्रशासनिक और सामाजिक समावेश (Administrative & Social)
आकांक्षी जिला कार्यक्रम (Aspirational Districts Programme - ADP): इसके अंतर्गत केंद्र, राज्य और स्थानीय प्रशासन के समन्वय से पटना और बिहार के सभी जिलों सहित देश के 112 सर्वाधिक पिछड़े क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा (SDG 3 और 4) के संकेतकों में सुधार किया जा रहा है। यह स्थानीय स्तर पर संघवाद (Localised Federalism) का उत्कृष्ट उदाहरण है।
2. प्रतिस्पर्धी-सहकारी संघवाद (Competitive-Cooperative Federalism)
सूचकांकों के माध्यम से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा: राज्यों के बीच विकास को प्रेरित करने हेतु नीति आयोग विभिन्न सूचकांक जारी करता है, जैसे— SDG इंडिया इंडेक्स (SDG India Index), राज्य स्वास्थ्य सूचकांक, और समग्र जल प्रबंधन सूचकांक (CWMI)। यह डेटा-संचालित शासन (Data-driven governance) को बढ़ावा देता है।
3. आर्थिक और रणनीतिक अनुकूलन (Economic & Strategic)
विभिन्न राज्यों की भौगोलिक और जनसांख्यिकीय आवश्यकताएं भिन्न होती हैं (जैसे पर्वतीय राज्य बनाम तटीय राज्य)। नीति आयोग 'वन-साइज-फिट्स-ऑल' (One size fits all) के बजाय राज्यों को उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप नीतियां बनाने में तकनीकी और रणनीतिक सहायता प्रदान करता है।
4. तकनीकी और ज्ञान साझेदारी (Technological & Knowledge Hub)
ज्ञान और नवाचार हब (Knowledge & Innovation Hub) के माध्यम से नीति आयोग वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं (Global Best Practices) तथा एक राज्य की सफल योजनाओं (जैसे किसी राज्य का ई-गवर्नेंस मॉडल) को दूसरे राज्यों के साथ साझा कर संस्थागत अधिगम (Institutional Learning) को सुगम बनाता है।
आलोचनात्मक मूल्यांकन: विधिक और संस्थागत चुनौतियां
नीति आयोग की सफलता के बावजूद इसके समक्ष कई विधिक और प्रशासनिक चुनौतियां विद्यमान हैं:
वित्तीय शक्तियों का अभाव: योजना आयोग के विपरीत, नीति आयोग के पास राज्यों को धन आवंटित करने का अधिकार नहीं है। वित्तीय शक्तियों का पूर्णतः वित्त मंत्रालय के पास होना राज्यों की स्वायत्तता और नीति आयोग की प्रभावशीलता को सीमित करता है।
गैर-संवैधानिक स्थिति: यह केवल एक कार्यकारी प्रस्ताव द्वारा गठित निकाय है। इसे संवैधानिक या वैधानिक (Statutory) दर्जा प्राप्त न होने के कारण, इसके निर्णयों की बाध्यकारिता कमजोर रहती है, जिससे अक्सर दलगत राजनीति के कारण विपक्षी शासित राज्यों के साथ विवाद उत्पन्न होते हैं।
केंद्रीय प्रायोजित योजनाएं (CSS): यद्यपि नीति निर्माण में राज्यों की भागीदारी बढ़ी है, परंतु कई केंद्रीय योजनाओं के डिजाइन और कार्यान्वयन में अभी भी राज्यों के साथ पर्याप्त पूर्व-परामर्श का अभाव देखा जाता है।
आगे की राह
भारत की विशाल भौगोलिक और राजनीतिक विविधता में 'सहकारी संघवाद' केवल एक सैद्धांतिक अवधारणा नहीं, बल्कि सुशासन की अनिवार्य शर्त है। द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2nd ARC) और पूंछी आयोग की भावना के अनुरूप, नीति आयोग को केवल एक सलाहकार निकाय तक सीमित न रखकर केंद्र-राज्य संबंधों में एक मजबूत रणनीतिक भागीदार के रूप में सशक्त किया जाना चाहिए।
'नया भारत 2047' के विजन को साकार करने और वैश्विक पटल पर भारत को एक आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए यह आवश्यक है कि नीति आयोग 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र को धरातल पर उतारे। राज्यों को वित्तीय रूप से अधिक स्वायत्त बनाकर और संस्थागत संवाद को निरंतर पारदर्शी रखकर ही भारतीय लोकतंत्र में सहकारी संघवाद की जड़ों को अजेय बनाया जा सकता है।