हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में क्वाड (QUAD) की भूमिका और इसमें भारत के रणनीतिक हितों की चर्चा करें।

 Q. हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में क्वाड (QUAD) की भूमिका और इसमें भारत के रणनीतिक हितों की चर्चा करें।

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चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद (QUAD - भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया) हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करने वाला एक प्रमुख रणनीतिक मंच है। वर्ष 2004 की सुनामी के दौरान एक अनौपचारिक राहत गठबंधन के रूप में शुरू हुआ यह मंच, आज 'स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत' (Free, Open, and Inclusive Indo-Pacific - FOIP) की परिकल्पना का मुख्य आधार बन गया है। हाल ही में अमेरिका के विल्मिंगटन (2024) में आयोजित क्वाड शिखर सम्मेलन और भारत द्वारा वर्ष 2025 में इसकी मेजबानी की प्रतिबद्धता ने इसे एक विशुद्ध सैन्य-साझेदारी से आगे बढ़ाकर 'वैश्विक जनहित' (Global Public Goods) प्रदाता के रूप में स्थापित कर दिया है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्वाड (QUAD) की बहुआयामी भूमिका

वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में क्वाड केवल एक सुरक्षा मंच नहीं रहा, बल्कि यह PESTLE (राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी, कानूनी, पर्यावरणीय) दृष्टिकोण के तहत एक व्यापक ढांचा बन चुका है:

1. सामरिक और समुद्री सुरक्षा (Strategic & Security)

  • समुद्री कार्यक्षेत्र जागरूकता (IPMDA): हिंद-प्रशांत समुद्री कार्यक्षेत्र जागरूकता पहल (Indo-Pacific Maritime Domain Awareness) के माध्यम से उपग्रह डेटा का उपयोग कर 'डार्क शिपिंग' (Dark Shipping) और अवैध मत्स्यन (IUU Fishing) की निगरानी की जा रही है।

  • क्षमता निर्माण: वर्ष 2024 में घोषित 'मैत्री' (MAITRI - Maritime Initiative for Training in the Indo-Pacific) पहल क्षेत्रीय देशों की समुद्री कानून प्रवर्तन क्षमताओं को मजबूत करती है।

2. आर्थिक और आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन (Economic)

  • सप्लाई चेन का विविधीकरण: चीन पर अत्यधिक निर्भरता ('चाइना प्लस वन' रणनीति) को कम करने के लिए क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव (Quad Critical Minerals Initiative) और सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखलाओं (Semiconductor Supply Chains Contingency Network) का निर्माण किया गया है।

  • भविष्य के बंदरगाह (Ports of the Future): यह साझेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थायी और लचीले बुनियादी ढांचे (Resilient Infrastructure) के विकास को बढ़ावा देती है, जो अपारदर्शी 'ऋण-जाल कूटनीति' (Debt Trap Diplomacy) का एक व्यवहार्य विकल्प प्रस्तुत करता है।

3. सामाजिक, स्वास्थ्य और मानवीय सहायता (Social & Humanitarian)

  • क्वाड कैंसर मूनशॉट (Quad Cancer Moonshot): सर्वाइकल कैंसर को लक्षित करने वाली यह ऐतिहासिक पहल, कोविड-19 वैक्सीन कूटनीति की सफलता के बाद क्वाड की स्वास्थ्य कूटनीति (Health Diplomacy) का उत्कृष्ट उदाहरण है।

  • आपदा प्रबंधन: क्वाड इंडो-पैसिफिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क प्राकृतिक आपदाओं (HADR) के दौरान तेजी से नागरिक और मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए सदस्य देशों की रसद (Logistics) और एयरलिफ्ट क्षमता का लाभ उठाता है।

4. तकनीकी और कानूनी सहयोग (Technological & Legal)

  • उभरती प्रौद्योगिकियां: 6G मानक, ओपन रैन (Open RAN), और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI-ENGAGE) पर संयुक्त शोध क्षेत्रीय नवाचार को गति दे रहे हैं।

  • अंतर्राष्ट्रीय कानून का पालन: क्वाड समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCLOS) का दृढ़ता से समर्थन करता है और नेविगेशन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) सुनिश्चित करने के लिए एक नियम-आधारित व्यवस्था की वकालत करता है।

क्वाड में भारत के रणनीतिक एवं राष्ट्रीय हित

हिंद-प्रशांत क्षेत्र भारत की विदेश नीति का गुरुत्व केंद्र (Center of Gravity) है। क्वाड में सक्रिय भागीदारी भारत के बहुआयामी राष्ट्रीय हितों को साधती है:

  • रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) और शक्ति संतुलन: भारत किसी औपचारिक सैन्य गठबंधन का हिस्सा बने बिना, मालाबार नौसैनिक अभ्यास (Malabar Exercise) और क्वाड के कूटनीतिक वजन के माध्यम से हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में चीन की आक्रामक 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' (String of Pearls) रणनीति को प्रतिसंतुलित कर रहा है।

  • 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' की भूमिका: गुरुग्राम स्थित 'इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर - इंडियन ओशन रीजन' (IFC-IOR) के माध्यम से भारत क्षेत्रीय देशों के साथ वास्तविक समय में समुद्री डेटा साझा कर रहा है, जो क्षेत्र में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका और नौवहन सुरक्षा को स्थापित करता है।

  • आर्थिक एकीकरण और तकनीकी हस्तांतरण: क्वाड फेलोशिप (Quad STEM Fellowship) और तकनीकी कार्यसमूहों के माध्यम से भारत अपने युवा कार्यबल के लिए उन्नत तकनीकों (Quantum, AI) और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) तक पहुंच सुनिश्चित कर रहा है।

  • 'सागर' (SAGAR) विजन का विस्तार: भारत की 'एक्ट ईस्ट नीति' (Act East Policy) और सागर (Security and Growth for All in the Region) का दृष्टिकोण क्वाड के समावेशी उद्देश्यों के साथ पूर्णतः संरेखित है, जो बहुध्रुवीय एशिया (Multipolar Asia) के निर्माण में सहायक है।

आगे की राह (Way Forward)

क्वाड की प्रासंगिकता और प्रभावशीलता को दीर्घकालिक बनाने के लिए इसे एक संस्थागत ढांचा (Institutional Framework) प्रदान करने की आवश्यकता है, जिसमें आसियान की केंद्रीयता (ASEAN Centrality) का सम्मान करते हुए दक्षिण पूर्व एशियाई और प्रशांत द्वीपीय देशों को विश्वास में लिया जाए। हार्ड पावर (Hard Power) की मुखरता के साथ-साथ डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (DPI) और जलवायु वित्तपोषण (Climate Financing) पर सामूहिक निवेश बढ़ाया जाना चाहिए।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उभरती चुनौतियां एक बहुध्रुवीय विश्व की भू-राजनीतिक जटिलताओं का प्रत्यक्ष परिणाम हैं। क्वाड के माध्यम से भारत की बहुपक्षीय कूटनीति न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक एकीकरण को सुदृढ़ करेगी, बल्कि 'वसुधैव कुटुंबकम' के दर्शन के अनुरूप एक न्यायसंगत और पारदर्शी वैश्विक व्यवस्था का मार्ग भी प्रशस्त करेगी। यह सहयोगात्मक शक्ति भारत को 'विकसित भारत @ 2047' के रणनीतिक लक्ष्यों तक पहुँचाने में एक प्रमुख आधारस्तंभ सिद्ध होगी।

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