शहरी बाढ़ (Urban Flooding) के कारणों का विश्लेषण करें। क्या यह प्राकृतिक आपदा से अधिक मानव निर्मित आपदा है?

 Q. शहरी बाढ़ (Urban Flooding) के कारणों का विश्लेषण करें। क्या यह प्राकृतिक आपदा से अधिक मानव निर्मित आपदा है?

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राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के अनुसार, शहरी बाढ़ (Urban Flooding) जलभराव की वह गंभीर स्थिति है जहाँ अनियोजित शहरीकरण के कारण तीव्र वर्षा का जल प्राकृतिक रूप से प्रवाहित या अवशोषित नहीं हो पाता है। हाल के वर्षों में चेन्नई, मुंबई, बेंगलुरु के साथ-साथ पटना और बिहार के सभी जिलों के शहरी केंद्रों में देखी गई बाढ़ की विभीषिका यह प्रमाणित करती है कि यह अब केवल एक मौसमी घटना नहीं रह गई है। जलवायु जोखिम सूचकांक (Global Climate Risk Index) भी भारतीय शहरों की इस बढ़ती सुभेद्यता की ओर निरंतर ध्यान आकृष्ट कर रहा है।

शहरी बाढ़ के प्रमुख कारण (बहुआयामी विश्लेषण)

1. पारिस्थितिक और जलवायु कारक (Environmental)

  • चरम मौसमी घटनाएं (Extreme Weather Events): जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून के पैटर्न में बदलाव आया है, जिससे 'कम समय में अत्यधिक वर्षा' (Cloudbursts) की घटनाओं में वृद्धि हुई है।

  • शहरी ऊष्मा द्वीप प्रभाव (Urban Heat Island - UHI): कंक्रीट और डामर के कारण शहरों का तापमान ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक होता है, जो स्थानीय स्तर पर संवहनीय वर्षा (Convective Rainfall) को तीव्र कर देता है।

2. ढांचागत और तकनीकी कारक (Infrastructural & Technological)

  • अभेद्य सतहें (Impervious Surfaces): तेजी से हो रहे कंक्रीटीकरण के कारण वर्षा जल के भूमिगत रिसाव (Groundwater Percolation) की दर अत्यंत न्यून हो गई है।

  • अपर्याप्त ड्रेनेज प्रणाली: अधिकांश भारतीय शहरों की सीवरेज और स्टॉर्म-वाटर ड्रेनेज प्रणाली दशकों पुरानी है (डिज़ाइन क्षमता सामान्यतः 12-20 मिमी/घंटा), जो वर्तमान जनसंख्या घनत्व और चरम वर्षा का भार सहने में अक्षम है।

3. प्रशासनिक और विधिक कारक (Governance & Legal)

  • आर्द्रभूमियों और जल निकायों का अतिक्रमण: रियल एस्टेट के दबाव में झीलों, तालाबों और प्राकृतिक जल-ग्रहण क्षेत्रों (Catchment Areas) का अतिक्रमण किया गया है।

  • ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की विफलता: प्लास्टिक कचरे (Single-use plastic) और निर्माण मलबे (C&D waste) के अवैज्ञानिक निपटान के कारण ड्रेनेज नेटवर्क पूरी तरह से अवरुद्ध हो जाते हैं।

  • मास्टर प्लान का शिथिल प्रवर्तन: शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के मध्य समन्वय का अभाव और भवन निर्माण उपनियमों (Building By-laws) का कठोरता से पालन न होना।

प्राकृतिक आपदा या मानव निर्मित आपदा?

यद्यपि शहरी बाढ़ का प्राथमिक उत्प्रेरक (Trigger) प्राकृतिक (अत्यधिक वर्षा) होता है, किंतु इसके विनाशकारी स्वरूप के लिए पूर्णतः मानव-निर्मित नीतियां और अनियोजित विकास उत्तरदायी हैं।

  • प्राकृतिक ढलान (Natural Gradient) का विनाश: अवैज्ञानिक रूप से सड़कों, ओवरब्रिज और तटबंधों का निर्माण जल के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा उत्पन्न करता है।

  • नदियों के बाढ़-मैदानों (Floodplains) पर निर्माण: नदियों के स्वाभाविक विस्तार क्षेत्र में बस्तियां बसाना मानव निर्मित भूल है (जैसे- पटना में गंगा/पुनपुन और दिल्ली में यमुना के खादर क्षेत्रों का अतिक्रमण)। अतः, NDMA शहरी बाढ़ को ग्रामीण बाढ़ से अलग एक 'विशिष्ट और मानव-निर्मित आपदा' (Distinct Man-made Disaster) मानता है।

शमन की रणनीतियां और समाधान

  • 'स्पंज सिटी' (Sponge City) मिशन: शहरी नियोजन में पारगम्य फुटपाथ (Permeable Pavements), रेन गार्डन, और अनिवार्य रूफटॉप हार्वेस्टिंग को शामिल करना, ताकि शहर स्पंज की तरह पानी सोख सकें।

  • नीली-हरित अवसंरचना (Blue-Green Infrastructure): शहरों के मास्टर प्लान में जल निकायों (Blue) और पार्कों/वनों (Green) का एकीकृत विकास करना।

  • NDMA दिशानिर्देशों का कठोर अनुपालन: मानसून पूर्व नालों की डिसिल्टिंग (Desilting), अतिक्रमण हटाना और प्राकृतिक ड्रेनेज बेसिन को पुनर्जीवित करना।

  • प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (EWS): डॉपलर वेदर रडार (DWR) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित सेंसर का उपयोग कर स्थानीय स्तर पर बाढ़ की सटीक भविष्यवाणी करना।

आगे की राह (Way Forward)

शहरी बाढ़ केवल अवसंरचनात्मक विफलता नहीं, बल्कि शहरी शासन (Urban Governance) की प्रणालीगत विफलता का परिचायक है। 74वें संविधान संशोधन की भावना के अनुरूप स्थानीय निकायों (ULBs) को वित्तीय और तकनीकी रूप से सशक्त करना अपरिहार्य है।

SDG 11 (टिकाऊ शहर और समुदाय) तथा SDG 13 (जलवायु कार्रवाई) को केंद्र में रखते हुए एक जलवायु-प्रत्यास्थी (Climate-resilient) शहरी विकास मॉडल अपनाना होगा। पटना और बिहार के सभी जिलों सहित देश के उभरते टियर-2 और टियर-3 शहरों में नियोजित विकास सुनिश्चित करके ही हम 'नव भारत 2047' (New India 2047) के सुरक्षित विजन और 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के समग्र कल्याणकारी संकल्प को यथार्थ के धरातल पर उतार सकते हैं।

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